कुलज्ञो हि च सर्वज्ञो वेदशास्त्रोज्झितोऽपि वा ।
वेदशास्त्रागमज्ञोऽपि कुलाज्ञस्त्वज्ञ एव हि ॥
वेद शास्त्र से रहित होकर भी कुलज्ञ सर्वज्ञ होता है और वेद शास्त्र तथा आगम का ज्ञाता भी यदि कुल को नहीं जानता, तो वह अज्ञ (मूर्ख) ही है।
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