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कुलार्णव • अध्याय 2 • श्लोक 72
चिरायासाल्पफलदं काङ्क्षते समयं जनाः । सुखेन सर्वफलदं कुलं कोऽपि त्यजत्यहो ॥
दीर्घ परिश्रम और थोड़ा फल देने वाले समय (मत) को लोग चाहते है। सुख से सभी फलों को देने वाले कुलधर्म को कौन छोड़ता है।
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