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कुलार्णव • अध्याय 2 • श्लोक 67
ते वन्द्यास्ते महात्मानः कृतार्थस्ते नरोत्तमाः । येषामुत्पद्यते चित्ते कुलज्ञानं मयोदितम् ॥
वे महात्मा वन्दनीय हैं, वे नर श्रेष्ठ कृतार्थ हैं, जिनके मन में मेरा बताया कुलज्ञान उत्पन्न होता है।
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