ते धन्याः पुण्यकर्माणस्ते सन्तस्ते च योगिनः ।
येषां भाग्यवशाद्देवि कुलज्ञानं प्रकाशते ॥
हे देवि! वे पुण्यकर्मी योगी धन्य है, वे सन्त हैं, और वे योगी हैं जिन्हें भाग्यवश कुल का ज्ञान प्राप्त होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।