यः कौलिकः कुलज्ञानं न पश्यति न विन्दति ।
न पूजयति धिक् तस्य तत् काकस्येव जीवितम् ॥
हे देवि! जो कौलिक कुल (शक्ति) को नहीं देखता, नहीं पहचानता अथवा उनकी पूजा नहीं करता, उसे धिक्कार है। उसका जीवन कौए के समान निरर्थक है।
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