गुरुकारुण्ययुक्तस्तु दीक्षानिर्धूतपातकः ।
कुलपूजारतो देवि सोऽयं कौलो न चेतरेः ॥
हे देवि! गुरु की कृपा को प्राप्त करने वाला, दीक्षा-संस्कार द्वारा जिसके पाप नष्ट हो गये हैं, कुल (देवी शक्ति) की पूजा में लगा हुआ मनुष्य ही कौल है, अन्य नहीं।
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