स पुमानुच्यते सद्धिः कुलधर्मपरायणः ।
अपरस्तु परं सत्यमस्थिकूटत्वचावृतः ॥
कुलधर्म परायण सज्जन ही मनुष्य कहलाने योग्य है। अन्य तो निःसन्देह केवल हड्डियों और खाल के पञ्जर मात्र होते हैं।
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