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कुलार्णव • अध्याय 2 • श्लोक 56
यो जन्तुर्नार्चयेत्त्वान्तु कुलधर्मसमाश्रितः । क्लिश्यते जातमात्रेण भूतारिणात्मशत्रुणा ॥
जो जीव कुलधर्म का आश्रय लेकर भगवती की पूजा नहीं करता, वह जन्म लेते ही आत्मशत्रु एवं भूतारियों (घातक जीवों) से क्लेश पाता है।
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