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कुलार्णव • अध्याय 2 • श्लोक 46
कुलधर्ममजानन् यः संसारान्मोक्षमिच्छति । पारावारमपारं स पाणिभ्यां तत्र्तुमिच्छति ॥
कुल (शक्ति देवी) की उपासना से सद्गति - कुलधर्म को बिना जाने हुए जो संसार में मोक्ष पाने की इच्छा करता है, वह मानों अपार सागर को हाथों से तैरकर पार करना चाहता है।
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