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कुलार्णव • अध्याय 2 • श्लोक 45
यथेन्द्राजालजा मायाः क्षणमेव सुखावहाः । श्रीकौलादन्यसमयास्तादृशाः कुलनायिके ॥
जिस प्रकार इन्द्रजाल से उत्पन्न माया क्षण भर तक ही सुख देती है, उसी प्रकार हे कुलनायिके! श्री कौल के अतिरिक्त अन्य धर्म (समय) अल्प काल तक ही सुख देते हैं।
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