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कुलार्णव • अध्याय 2 • श्लोक 41
कुलशास्त्रमनादृत्य पशुशास्त्राणि योऽभ्यसेत् । स्वगृहे पायसं त्यक्त्वा भिक्षामटति पार्वति ॥
हे पार्वति! कुलशास्त्र का अनादर कर जो पशु-शास्त्रों का अभ्यास करता है, वह मानों अपने घर की खीर छोड़कर अन्य लोगों से भीख माँगता फिरता है।
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