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कुलार्णव • अध्याय 2 • श्लोक 40
कुलधर्ममहामार्गगन्ता मुक्तिपुरीं व्रजेत् । अचिरान्नात्र सन्देहस्तस्मात् कौलं समाश्रयेत् ॥
कुलधर्म के महामार्ग से जाकर अविलम्ब ही मुक्तिपुरी में पहुँचा जाता है, इसमें सन्देह नहीं। अतएव कौल मार्ग का आश्रय ग्रहण करना चाहिये।
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