ब्रह्माविष्णुगुहादीनां न मया कथितं पुरा ।
कथयामि तव स्नेहात् शृणुष्वैकाग्रमानसा ॥
पहले हमने ब्रह्मा, विष्णु एवं गुह (कार्तिकेय) को भी इसे नहीं बताया है, किन्तु मैं आपके स्नेहवशात् कहता हूँ। अतः एकाग्र मन होकर सुनिए।
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