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कुलार्णव • अध्याय 2 • श्लोक 35
अनहें कुलविज्ञानं न तिष्ठति कदाचन । तस्मात् परीक्ष्य वक्तव्यं कुलज्ञानं मयोदितम् ॥
अनधिकारी व्यक्ति कुलधर्म के विज्ञान को समझ नहीं सकता। अतः परीक्षा लेकर ही अधिकारी व्यक्ति को मेरे बताए गए कुलधर्म का ज्ञान कराना चाहिये।
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