श्रद्धा, नम्रता, हर्ष आदि के साथ सदाचार के नियमों का दृढ़ता से पालन करते हुये जो साधक गुरु की आज्ञा एवं धर्म को मानता है, उसे कुलधर्म का ज्ञान होता है।
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