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कुलार्णव • अध्याय 2 • श्लोक 33
श्रीगुरौ कुलशास्त्रेषु कौलिकेषु कुलाश्रये । यस्य भक्तिर्दृढा तस्य कुलज्ञानं प्रकाशते ॥
श्री गुरुदेव में, कुलधर्म के शास्त्रों में, कौलिकों में और कौल-परिवारों में जिसकी दृढ़ भक्ति होती है, उसे कुलधर्म का ज्ञान मिलता है।
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