श्री ईश्वर उवाच
शृणु देवि प्रवक्ष्यामि यन्मां त्वं परिपृच्छसि ।
तस्य श्रवणमात्रेण योगिनीनां प्रियो भवेत् ॥
ईश्वर ने कहा - हे देवि! सुनिए, जो आप पूछती हैं, उसे मैं कहूँगा। जिसके श्रवण मात्र से साधक योगिनियों का प्रिय होता है।
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