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कुलार्णव • अध्याय 2 • श्लोक 29
सर्वधर्माश्च देवेशि पुनरावर्त्तकाः स्मृताः । कुलधर्मस्थिता ये च ते सर्वेऽप्यनिवर्त्तकाः ॥
अन्य सभी धर्म तो 'पुनरावर्तक' हैं अर्थात् उनके पालन करने वाले आवागमन के चक्र में पड़े रहते हैं। किन्तु हे देवेशि! सभी कुलधर्मानुयायी 'अनिवर्तक' अर्थात् आवागमन से मुक्त हो जाते हैं।
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