मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
कुलार्णव • अध्याय 2 • श्लोक 28
शैववैष्णवदौर्गार्कगाणपत्येन्दुसम्भवैः मन्त्रैर्विशुद्धचित्तस्य कुलज्ञानं प्रकाशते ॥
शैव, वैष्णव, दुर्गा, सूर्य या गणपति, आदि किसी भी सम्प्रदाय के मन्त्रों से जिसका चित्त विशुद्ध हो चुका है, उसे ही कुलधर्म का ज्ञान होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें