विहाय सर्वधर्मांश्च नानागुरुमतानि च ।
कुलमेव विजानीयाद्यदीच्छेत् सिद्धिमात्मनः ॥
अतः यदि आत्मसिद्धि प्राप्त करने की इच्छा हो, तो सभी धर्मों और नाना मतवादों को छोड़कर कुलधर्म का ही ज्ञान प्राप्त करे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।