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कुलार्णव • अध्याय 2 • श्लोक 19
कुलधर्मप्रवहणं समारुह्य नरोत्तमः । स्वर्गादि द्वीपान्तरं गत्वा मोक्षरत्नं समश्नुते ॥
हे देवि! कुलधर्म के रथ पर चढ़कर श्रेष्ठ मनुष्य इस लोक को पारकर स्वर्ग को जाता है और मोक्षरूपी रत्न को प्राप्त करता है।
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