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कुलार्णव • अध्याय 2 • श्लोक 16
अस्ति चेत्त्वत्समा नारी मत्समः पुरुषोऽस्ति चेत् । कुलेन समधर्मस्तु तथापि न कदाचन ॥
आप (देवि) के जैसे कोई नारी हो सकती है और मेरे (शिव) जैसा कोई पुरुष भी हो सकता है किन्तु कुल धर्म के समान कोई धर्म नहीं हो सकता।
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