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कुलार्णव • अध्याय 2 • श्लोक 15
मेरुसर्षपयोर्यद्वत् सूर्यखद्योतयोर्यथा । तथान्यसमयस्यापि कुलस्य महदन्तरम् ॥
जैसे मेरु पर्वत और सरसों के दाने में और सूर्य एवं जुगनू के प्रकाश में बराबरी नहीं है उसी प्रकार अन्य मतवादों और कुलधर्म के बीच कोई तुलना नहीं है किन्तु महान् अन्तर है।
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