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कुलार्णव • अध्याय 2 • श्लोक 14
यथामरतरङ्गिण्या न समाः सकलापगाः । तथैव समयाः सर्वे कुलधर्मेण नो समाः ॥
जैसे अन्य नदियाँ कभी भी गङ्गा नहीं बन सकती है उसी प्रकार अन्य मतवाद भी कभी कुलधर्म के समान नहीं बन सकते।
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