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कुलार्णव • अध्याय 2 • श्लोक 117
कुलशास्त्राणि सर्वाणि मयैवोक्तानि पार्वति । प्रमाणानि न सन्देहो न हन्तव्यानि हेतुभिः ॥
हे पार्वति! सभी कुल-शास्त्रों को मैंने ही कहा है। अतः वे स्वतः प्रमाण हैं। इसमें सन्देह नहीं है अतः तर्क-वितर्क द्वारा साधक को उनका खण्डन नहीं करना चाहिए।
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