तृणं वाप्यविधानेन छेदयेन्न कदाचन ।
विधिना गां द्विजं वापि हत्या पापैर्न लिप्यते ॥
बिना विधि-विधान के तिनके को भी नहीं तोड़ना चाहिए। विधिपूर्वक बैल या द्विज का भी वध करने से पाप नहीं होता।
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