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कुलार्णव • अध्याय 2 • श्लोक 112
धनैर्विक्रयिको हन्ति खादिता चोपभोगतः । घातको वध बन्धाभ्यां इत्येष त्रिविधो वधः ॥
धन के लिए पशु बेचना, मांस खाकर उपभोग करना और बँधे हुए पशु का वध करना - ये तीन प्रकार के 'वध' है।
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