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कुलार्णव • अध्याय 2 • श्लोक 111
अनुमन्ता विश्वसिता निहन्ता क्रयविक्रयी । संस्कर्ता चोपहर्त्ता च खादिताऽष्टौ च घातकाः ॥
१. पशु का वध के लिए अनुमान करने वाला, २. पशु को विश्वास में लाने वाला, ३. पशु का वध करने वाला, ४. पशु को खरीदने वाला, ५. पशु को बेचने वाला, ६. पशु का संस्कार करने वाला, ७. पशु को लाने वाला, और ८. पशु मांस को खाने वाला ये आठ प्रकार के 'घातक' कहे गये हैं।
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