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कुलार्णव • अध्याय 2 • श्लोक 1
श्रीदेव्युवाच- कुलेश श्रोतुमिच्छामि सर्वजीवदयानिधे । कुलधर्मस्त्वया देव सूचितो न प्रकाशितः ॥
श्री देवी ने पूछा - हे कुलेश! हे सभी जीवों पर दया करने वाले! आपने कुलधर्म के सम्बन्ध में तो बताया, किन्तु उस पर प्रकाश नहीं डाला। उसे मैं सुनना चाहती हूँ।
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