हे देवि! प्राज्ञ अर्थात् प्रकृष्टरूप से ज्ञान रखने वाले को जो-जो बातें जाननी चाहिये, उनका कुछ वर्णन मैंने भुक्ति मुक्ति रूपी फल के इच्छुक साधकों के हित के लिये किया है।
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