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कुलार्णव • अध्याय 17 • श्लोक 95
पुस्तकञ्च महेशानि पशुगेहे न निक्षिपेत् । न दद्यात् पशुहस्ते च न पठेत् पशुसन्निधौ । न पठेदासवोल्लासं ग्रन्थं भूमौ न निक्षिपेत् ॥
हे महेशानि! पुस्तक को पशु (अधार्मिक) के घर में न छोड़े। न तो पशु के हाथ में इसे दे और न पशु के सामने इसे पढ़े। आसवोल्लास को पढ़े नहीं और पुस्तक को भूमि पर न रखे।
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