हे कुलेश्वरि! १. मधु (शहद), २. आज्य (घी) और ३. दही - इन तीनों से 'मधुपर्क' बनता है। इलायची, चन्दन, कस्तूरी, काला अगरु आदि से सुगन्धित जल द्वारा देह का प्रक्षालन करना 'स्नान' है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।