मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
कुलार्णव • अध्याय 17 • श्लोक 91
मध्वाज्यद‌द्धिभिः प्रोक्तो मधुपर्कः कुलेश्वरि । देहप्रक्षालनं स्नानं सुगन्धिसलिलैः सह ॥ चन्द्राचन्दनकस्तूरीकालागुरुभिरुच्यते ।
हे कुलेश्वरि! १. मधु (शहद), २. आज्य (घी) और ३. दही - इन तीनों से 'मधुपर्क' बनता है। इलायची, चन्दन, कस्तूरी, काला अगरु आदि से सुगन्धित जल द्वारा देह का प्रक्षालन करना 'स्नान' है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें