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कुलार्णव • अध्याय 17 • श्लोक 89
अखिलाघप्रशमनार्द्धनपुत्रविवर्द्धनात् । अनर्घफलदानाच्च अध्र्घ्यमित्यभिधीयते ॥
अखिल अघों (पापों) को शान्त करने से तथा धन पुत्र की वृद्धि करने से और अनर्घ (पुण्य) फल देने से 'अर्घ्य' कहलाता है।
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