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कुलार्णव • अध्याय 17 • श्लोक 88
पाद्यं श्यामाकदूर्वाब्जविष्णुक्रान्ताभिरुच्यते । जातालवङ्गकक्कोलैरुक्तमाचमनीयकम् ॥
श्यामाक, दूर्वा, अब्ज और विष्णुक्रान्ता से 'पाद्य' होता है। जाती, लवङ्ग, कक्कोल से 'आचमनीय' कहा है।
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