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कुलार्णव • अध्याय 17 • श्लोक 86
देवताने षडङ्गानां न्यासः स्यात् सकलीकृतिः । आच्छादनं समुद्दिष्टमवगुण्ठनमीरितम् ॥
देवता के शरीर में षडङ्गों का न्यास करना 'सकली-कृति' है। आच्छादन करना (बँकना) ही 'अवगुण्ठन' है।
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