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कुलार्णव • अध्याय 17 • श्लोक 84
देवं पूजार्थमाह्वानमावाहनमिति स्मृतम् । आसने सन्निवेशः स्यात् स्थापनं कुलनायिके ॥
पूजा के लिये देवता का आह्वान करना (बुलाना) 'आवाहन' कहलाता है। हे कुलनायिके! आसन पर बैठाना 'स्थापन' है।
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