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कुलार्णव • अध्याय 17 • श्लोक 75
बहुप्रकारविचरद् भूतौघप्रीतिकारणात् । लिप्तपापप्रशमनाद् बलिरित्यभिधीयते ॥
बहु प्रकार से विचरते हुये भूतों के समूह का निवारण करने से और लिप्त पापों के विनाशक होने से 'बलि' कही जाती है।
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