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कुलार्णव • अध्याय 17 • श्लोक 74
चतुर्विधं कुलेशानि द्रव्यञ्च षड्रसान्वितम् । निवेदनाद्भवेत्तृप्तिनैवेद्यं समुदाहृतम् ॥
हे कुलेशानि! छः रसों से युक्त (चोष्य लेह्यादि) चार प्रकार के द्रव्यों को निवेदित करने से तृप्ति होती है। अतः 'नैवेद्य' कहलाता है।
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