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कुलार्णव • अध्याय 17 • श्लोक 72
दीर्घाज्ञानमहाध्वान्ताहङ्कारपरिवर्जनात् । परतत्त्वप्रकाशाच्च दीप इत्यभिधीयते ॥
दीर्घ अज्ञान के महान्धकार और अहङ्कार को दूर करने से तथा परतत्व का प्रकाश करने से 'दीप' कहा जाता है।
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