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कुलार्णव • अध्याय 17 • श्लोक 68
आघ्राणनप्रजननान् मोक्षमार्गप्रदर्शनात् । दग्धदुः खादिदमनादामोद इति कथ्यते ॥
आघ्राण (सुगन्धि) को देने से, मोक्षमार्ग को दिखाने से और दग्ध, दुःखादि का दमन करने से 'आमोद' कहा जाता है।
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