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कुलार्णव • अध्याय 17 • श्लोक 66
तत्त्वात्मकस्य देवस्य परिवारवृतस्य च । नवानन्दप्रजननात्तर्पणं समुदाहृतम् ॥
तत्त्वात्मक देवता को उसके परिवार सहित नवानन्द प्रदान करने से 'तर्पण' कहा जाता है।
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