सुमनसः सेवितत्वाद् राज्यदत्वात् सदा प्रिये ।
सुराकारप्रदानत्वात् सुरेति परिकीर्त्तिता ॥
हे प्रिये! सुन्दर मन द्वारा सेवित होने से, सदा राज्यदायिनी होने से और सुर (देव) रूप को प्रदान करने से 'सुरा' कहलाती है।
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