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कुलार्णव • अध्याय 17 • श्लोक 53
अनन्तफलदानाच्च क्षपिताशेषकल्मषात् । मातृकात्मतया लाभकरणादक्षमालिका ॥
अनन्त फल देने से, समस्त पापों को क्षपित (नष्ट) करने से, मातृकात्मक (मातृकाओं वर्णों से बनी) होने से और लाभकारिणी होने से 'अक्षमालिका' कही जाती है।
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