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कुलार्णव • अध्याय 17 • श्लोक 48
उल्बणत्वात् परत्वाच्च देवताप्रीतिदानतः । शक्तिपातनिमित्तादप्युपदेश इति स्मृतः ॥
उल्वण (अति प्रभावशाली) होने से, परम (श्रेष्ठ) होने से, देवता की प्रीति दिलाने से और शक्तिपात करने से 'उपदेश' कहा जाता है।
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