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कुलार्णव • अध्याय 17 • श्लोक 47
अहम्भावहराद्धीतिमथनात् सेचनादपि । कम्पानन्दादिजननादभिषेक इति स्मृतः ॥
अहं भाव को दूर करने से, भयों को दूर करने से, सेचन (सिञ्चन) करने से और कम्पादि आनन्द को उत्पन्न करने से 'अभिषेक' कहलाता है।
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