मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
कुलार्णव • अध्याय 17 • श्लोक 44
श्रुतानेकमहामन्त्रयन्त्रतन्त्रादिदैवतात् । श्रुतौ यदनविच्छिन्नाच्छ्रौत इत्यभिधीयते ॥
अनेक महामन्त्रों, यन्त्रों, और दैवतों के श्रुत होने (सुनने) से और श्रुति (वेद) से अभिन्न होने से 'श्रौत' कहलाता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें