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कुलार्णव • अध्याय 17 • श्लोक 39
शाकिनीगणपूज्यत्वात्तारणाद्भववारिधे । परादिशक्तिसान्निध्याच्छाक्त इत्यभिधीयते ॥
शाकिनीगण की पूजा करने से, भवसागर को तरने (पार करने) से और परा आदि शक्ति का सान्निध्य प्राप्त करने से 'शाक्त' कहा जाता है।
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