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कुलार्णव • अध्याय 17 • श्लोक 38
आचारकथना‌द्दिव्यगतिप्राप्तिनिदानतः । महात्मतत्त्वकथनादागमः कथितः प्रिये ॥
हे प्रिये! आचार का वर्णन करने से, दिव्यगति को प्राप्त करने का विधान बताने से और महान् अर्थतत्त्व का कथन करने से 'आगम' कहलाता है।
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