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कुलार्णव • अध्याय 17 • श्लोक 37
इष्टधर्मादिकथनात्तिमिराज्ञानभञ्जनात् । हरणात् सर्वदुः खानां इतिहास इति स्मृतः ॥
इष्ट एवं धर्म आदि का कथन करने से, तिमिर (अज्ञानान्धकार) को नष्ट करने से और सब दुःखों का हरण करने से 'इतिहास' कहा जाता है।
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