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कुलार्णव • अध्याय 17 • श्लोक 36
स्मरणोत्सुकनिष्ठानां धर्माधर्मनिरूपणात् । तिमिरोत्पाटनाद्देवि स्मृतिरित्यभिधीयते ॥
निमित्तों का स्मरण करने से, धर्म, अधर्म का निरूपण करने से और हे देवि! अज्ञान तिमिर (अन्धकार) को दूर करने से 'स्मृति' कही जाती है।
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